हरित दीपावली 2026: स्वच्छ वायु के लिए त्योहार का अभियान क्यों महत्त्वपूर्ण है?
पटाखे न चलाने की अपील एक बड़े नीतिगत प्रश्न को सामने लाती है। जब वायु प्रदूषण के अनेक स्रोत हों, तब नागरिकों के स्वैच्छिक निर्णय स्वच्छ हवा में कितना योगदान दे सकते हैं? संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की तैयारी में इसका उत्तर नागरिक व्यवहार, विश्वसनीय नगरपालिका सेवाओं और प्रदूषण नियंत्रण को साथ रखकर देना चाहिए। अभियान किसी टाले जा सकने वाले उत्सर्जन को घटा सकता है, लेकिन स्थायी सुधार के लिए पूरे वर्ष प्रयास आवश्यक हैं।
20 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के ईआईएसीपी कार्यक्रम केंद्र द्वारा राष्ट्रीय हरित दीपावली अभियान की घोषणा की। 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक चलने वाला यह अभियान मिशन लाइफ के अनुरूप पटाखों से मुक्त उत्सव को प्रोत्साहित करता है। इसमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के 130 नगरों पर विशेष ध्यान है। इस लेख के लिए अभियान संबंधी जानकारी 21 अक्टूबर 2026 को जाँची गई है।
समस्या समझने के लिए तीन आवश्यक अंतर
सबसे पहले उत्सर्जन, सांद्रता और संपर्क को अलग समझें। उत्सर्जन किसी स्रोत से प्रदूषक निकलना है। सांद्रता बताती है कि वायु के निश्चित आयतन में प्रदूषक कितना है। संपर्क का संबंध उस प्रदूषण से है जिसका सामना व्यक्ति करता है और जिस अवधि तक करता है। उत्सर्जन घटाना आवश्यक है, लेकिन मौसम तथा लोगों का स्थान यह प्रभावित करते हैं कि उन्हें कितना लाभ मिलेगा।
उदाहरण के लिए समान यातायात वाली दो गलियों की कल्पना करें। एक खुली है और उसमें हवा आसानी से बहती है। दूसरी संकरी है तथा इमारतों से घिरी है। दोनों में प्रदूषण की सांद्रता समान होना आवश्यक नहीं है। सड़क किनारे काम करने वाले व्यक्ति और उसी समय सड़क से दूर रहने वाले व्यक्ति का संपर्क भी अलग हो सकता है। यह समझाने वाला उदाहरण है, किसी वास्तविक नगर का मापा हुआ परिणाम नहीं।
इसी कारण नीति में प्रदूषण के स्रोत और लोगों की स्थिति दोनों देखनी चाहिए। खरीदी गई मशीनों या आयोजित कार्यक्रमों की संख्या गतिविधि बताती है। घरों, विद्यालयों और कार्यस्थलों के आसपास लगातार सुधार परिणाम के बारे में अधिक जानकारी देता है। मुख्य परीक्षा के अच्छे उत्तर में गतिविधि से परिणाम तक पहुँचने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।
कणीय पदार्थ: आकार, उत्पत्ति और स्वास्थ्य
कणीय पदार्थ वायु में मौजूद छोटे ठोस कणों और तरल बूँदों का मिश्रण है। पीएम10 और पीएम2.5 अलग-अलग रसायनों के नाम नहीं, बल्कि आकार की श्रेणियाँ हैं। पीएम2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम वायुगतिकीय व्यास वाले सूक्ष्म कण आते हैं। पीएम10 में 10 माइक्रोमीटर तक के कण शामिल होते हैं। छोटी आकार श्रेणी व्यापक श्रेणी के भीतर आती है।
कण सीधे किसी स्रोत से निकल सकते हैं या वायुमंडल में रासायनिक अभिक्रियाओं से बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ईंधन दहन, परिवहन, उद्योग, कृषि गतिविधियों और कचरा जलाने जैसे स्रोतों का उल्लेख करता है। सूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक पहुँच सकते हैं और कुछ रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए वायु प्रदूषण श्वसन के साथ हृदय और रक्तवाहिनियों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। यह जनस्वास्थ्य संबंधी विवेचन है, किसी व्यक्ति का निदान नहीं।
नीतिगत विश्लेषण में दिखाई देने वाले धुएँ को पूरी समस्या न मानें। आँखों को जो दिखता है, वह साँस के साथ भीतर जाने वाले सभी प्रदूषकों का पूरा संकेत नहीं देता। इसी तरह एक दिखाई देने वाला स्रोत घटने से दूसरे स्रोत हानिरहित नहीं हो जाते। सार्वजनिक अनुभव के साथ निगरानी और स्रोत संबंधी प्रमाण भी आवश्यक हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक क्या बताता है?
भारत का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक, अर्थात एक्यूआई, निगरानी के जटिल आँकड़ों को सूचकांक और श्रेणियों के रूप में प्रस्तुत करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रणाली में आठ प्रदूषक हैं: पीएम10, पीएम2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, अमोनिया और सीसा। समग्र सूचकांक प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध सबसे खराब प्रदूषक उपसूचकांक से निर्धारित होता है। यह सभी सांद्रताओं का साधारण औसत नहीं है।
| वायु गुणवत्ता श्रेणी | सूचकांक सीमा |
|---|---|
| अच्छी | 0–50 |
| संतोषजनक | 51–100 |
| मध्यम प्रदूषित | 101–200 |
| खराब | 201–300 |
| बहुत खराब | 301–400 |
| गंभीर | 401–500 |
एक्यूआई वायु की गुणवत्ता बताता है। इससे पटाखों, यातायात या किसी अन्य स्रोत का प्रतिशत योगदान अपने आप ज्ञात नहीं होता। 200 का सूचकांक यह नहीं बताता कि पीएम2.5 की सांद्रता 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। सूचकांक का मान और प्रदूषक की सांद्रता अलग मात्राएँ हैं। प्रारंभिक परीक्षा के लिए किसी एक दिन का आँकड़ा याद करने से अधिक उपयोगी यह अंतर समझना है।
शरद और शीत ऋतु में प्रदूषण क्यों बढ़ सकता है?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की शीतकालीन समस्या समझाते समय जारी उत्सर्जन, क्षेत्रीय परिवहन तथा प्रतिकूल मौसम के संयुक्त प्रभाव पर ध्यान देता है। कमजोर फैलाव से प्रदूषक जमा हो सकते हैं। तापमान व्युत्क्रमण ऊर्ध्वाधर मिश्रण सीमित कर सकता है। हवा की दिशा और गति भी प्रदूषण के स्थानांतरण को प्रभावित करती हैं। मौसम उत्सर्जन का असर बढ़ा सकता है, लेकिन स्रोतों पर नियंत्रण की आवश्यकता समाप्त नहीं करता।
इससे मूल्यांकन की चुनौती पैदा होती है। मान लें कि अभियान के तुरंत बाद हवा बेहतर हो गई। क्या इसका कारण कम उत्सर्जन, तेज हवा, वर्षा या इनका संयुक्त प्रभाव था? इसके विपरीत, प्रतिकूल मौसम किसी उपयोगी कार्रवाई का लाभ कुछ समय के लिए छिपा सकता है। पहले और बाद की एक तस्वीर या एक दिन का आँकड़ा निर्णायक प्रमाण नहीं होता। तुलना में उचित समयावधि और मौसम दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
स्वैच्छिक व्यवहार की भूमिका
अभियान पटाखों से बचने, एकल उपयोग प्लास्टिक घटाने, कचरा अलग करने और ऊर्जा दक्ष प्रकाश अपनाने को प्रोत्साहित करता है। विद्यालय, आवासीय समूह और समुदाय इसके सहभागी हैं। मिशन लाइफ से इसका संबंध दैनिक उपभोग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का है। परीक्षा में जागरूकता अभियान और प्रवर्तनीय कानूनी प्रतिबंध अलग रखें। केवल अभियान की घोषणा से देशव्यापी प्रतिबंध स्थापित नहीं होता।
स्वैच्छिक प्रयास तब अधिक प्रभावी होते हैं जब अपेक्षित विकल्प आसान और सामाजिक रूप से स्वीकार्य हो। कोई मोहल्ला बिना आतिशबाजी के सामूहिक उत्सव की व्यवस्था कर सकता है, जानकारी पहले साझा कर सकता है और कचरा संग्रह के उपयोगी स्थान बना सकता है। ऐसी व्यवस्था परिवारों का व्यक्तिगत प्रयास कम करती है। नागरिकों को व्यावहारिक विकल्प दिखाई दे तो समझाने की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनती है।
फिर भी नागरिक भागीदारी सार्वजनिक जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकती। परिवार कचरा अलग करे, लेकिन संग्रह के दौरान वह फिर मिल जाए या बाद में जला दिया जाए, तो प्रयास का लाभ घटता है। प्रभावी कार्यक्रम नागरिक के कदम को अगली संस्थागत कार्रवाई से जोड़ता है। व्यवहार और सेवा वितरण का यही संबंध शासन संबंधी विश्लेषण में केंद्रीय महत्त्व रखता है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और स्थानीय क्रियान्वयन
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जनवरी 2019 में शुरू हुआ था। जुलाई 2025 के संसदीय उत्तर में इसे केंद्र, राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों की बहुक्षेत्रीय पहल बताया गया। इसमें स्रोत आधारित स्वच्छ वायु कार्ययोजनाएँ महत्त्वपूर्ण हैं। प्राणा पोर्टल भौतिक और वित्तीय प्रगति सहित क्रियान्वयन की निगरानी करता है। अक्टूबर 2026 की अभियान घोषणा कार्यक्रम के 130 नगरों का उल्लेख करती है।
नगरपालिका की कार्ययोजना को कुछ व्यावहारिक प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए। किस स्रोत पर कार्रवाई होगी? जिम्मेदार विभाग कौन है? संसाधन कितने चाहिए? सफलता किस परिवर्तन से पहचानी जाएगी? ये प्रश्न स्वच्छ वायु की व्यापक प्रतिबद्धता को प्रशासनिक कार्यक्रम में बदलते हैं। जब कई एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी बँटी हो, तब इनकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
उदाहरण के लिए धूल नियंत्रण केवल उपकरण खरीदने से पूरा नहीं होता। मार्ग, संचालन की आवृत्ति, रखरखाव और निस्तारण भी महत्त्वपूर्ण हैं। कचरा जलाना रोकने के लिए प्रवर्तन के साथ संग्रह तथा शिकायत निवारण चाहिए। सार्वजनिक परिवहन ऐसा होना चाहिए जिसे लोग वास्तव में उपयोग कर सकें। ये क्रियान्वयन समझाने वाले उदाहरण हैं, प्रत्येक नगर की सफलता के दावे नहीं।
मुख्य परीक्षा के संतुलित उत्तर की पाँच चुनौतियाँ
1. प्रशासनिक सीमा से आगे जाने वाला प्रदूषण
नगर अपने कुछ स्रोत नियंत्रित करते हुए बाहर से भी प्रदूषण प्राप्त कर सकता है। इसलिए पड़ोसी क्षेत्रों का समन्वय जरूरी है। नगरपालिका सीमा को हवा की सीमा नहीं माना जा सकता। स्थानीय जवाबदेही और क्षेत्रीय सहयोग दोनों चाहिए। अन्यथा एक संस्था पूरी जिम्मेदारी दूसरे पर डालकर अपने हिस्से का काम भी छोड़ सकती है।
2. दृश्यता के कारण प्राथमिकताओं में असंतुलन
अल्पकालिक लेकिन स्पष्ट दिखाई देने वाली घटना अधिक ध्यान खींचती है। लगातार होने वाले कम दृश्य उत्सर्जन को कम महत्व मिल सकता है। प्रशासन को त्योहार के टाले जा सकने वाले उत्सर्जन के साथ वर्षभर के स्रोत भी संबोधित करने चाहिए। प्राथमिकता स्रोत और संपर्क के प्रमाण से तय हो, किसी एक घटना को पूरी समस्या मानकर नहीं।
3. स्वच्छ विकल्पों की व्यावहारिक लागत
सलाह देते समय वहनीयता और पहुँच देखें। यात्रा या कचरा निस्तारण का व्यवहार बदलने को कहना, लेकिन विश्वसनीय विकल्प न देना, अनुपालन कमजोर कर सकता है। स्पष्ट अपेक्षाओं के साथ उपयोगी सेवाएँ और आवश्यक सहायता जोड़ना बेहतर होगा। न्यायसंगत व्यवस्था पर्यावरणीय कार्रवाई की विश्वसनीयता बढ़ाती है तथा कम विकल्प वाले लोगों पर असंगत बोझ घटाती है।
4. खर्च और परिणाम का अंतर
धन के उपयोग की निगरानी जरूरी है, लेकिन खर्च अपने आप स्वच्छ हवा का प्रमाण नहीं है। मूल्यांकन में काम की गुणवत्ता और प्रदूषण की संबंधित प्रवृत्तियाँ देखें। उपयोगी सूचना प्रणाली बताए कि क्या काम हुआ, कहाँ हुआ और अपेक्षित परिवर्तन आया या नहीं। आँकड़ों की कमी भी स्पष्ट होनी चाहिए; अनिश्चितता को निश्चित सफलता के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
5. अभियान के बाद निरंतरता
प्रतिज्ञा अभियान चर्चा शुरू कर सकता है, पर आदत बदलने के लिए निरंतरता चाहिए। विद्यालय और आवासीय समूह त्योहार के बाद भागीदारी की समीक्षा कर सकते हैं। नगरपालिकाएँ अनुवर्ती कार्रवाई बता सकती हैं। ये सुधार के सुझाव हैं। मुख्य कसौटी यह है कि आयोजन टिकाऊ अभ्यास बना या तस्वीर और उपस्थिति की संख्या तक सीमित रहा।
यूपीएससी और राज्य सेवाओं में उपयोग
सामान्य अध्ययन तृतीय में इसे पर्यावरण प्रदूषण, संरक्षण और नियंत्रण उपायों से जोड़ें। सामान्य अध्ययन द्वितीय में स्थानीय सेवाओं, समन्वय और जवाबदेही पर विचार करें। राज्य सेवाओं में संबंधित राज्य के नगर का उदाहरण उपयोगी होगा। उसके लिए सत्यापित स्थानीय प्रमाण लें। दिल्ली की परिस्थितियाँ या स्रोतों का अनुपात प्रत्येक नगर पर लागू न करें।
उत्तर की शुरुआत सत्यापित समाचार से करें, फिर प्रदूषण की प्रक्रिया समझाएँ और संस्थागत जिम्मेदारियों तथा सुधारों का मूल्यांकन करें। अभियान का तथ्य, वैज्ञानिक व्याख्या और अपना सुझाव स्पष्ट रूप से अलग रखें। यहाँ किसी विशिष्ट पूर्ववर्ष प्रश्न का दावा नहीं किया गया है, क्योंकि उसके लिए मूल प्रश्नपत्र और वर्ष का सत्यापन नहीं हुआ है।
पुनरावृत्ति के मुख्य बिंदु
- उत्सर्जन, परिवेशी सांद्रता और मानवीय संपर्क अलग अवधारणाएँ हैं।
- पीएम2.5 तथा पीएम10 आकार श्रेणियाँ हैं; एक्यूआई सूचना देने वाला सूचकांक है।
- मौसम फैलाव को प्रभावित करता है, इसलिए परिणाम के मूल्यांकन में उसे देखें।
- नगरपालिका सेवाओं का सहयोग मिलने पर नागरिक व्यवहार अधिक प्रभावी होता है।
- त्योहार का अभियान नियमित स्रोत आधारित प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत करे।
अगला अभ्यास: आईएएसलैडर ऐप पर पर्यावरण की अवधारणाओं का अभ्यास करें और प्रदूषण, स्थानीय शासन तथा सार्वजनिक नीति की टिप्पणियों को दोहराएँ।
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