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प्र.1 1947 के संक्रमण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश सर्वोपरिता समाप्त होने से रियासतों का स्वतः भारत में विलय हो गया। 2. आरंभिक अधिमिलन सामान्यतः रक्षा, विदेश मामले और संचार से संबंधित था। 3. निर्दिष्ट विषयों पर अधिमिलन और पूर्ण प्रशासनिक एकीकरण अलग प्रक्रियाएँ थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) केवल 2 और 3
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। सर्वोपरिता समाप्त होने से पुराना साम्राज्यवादी संबंध खत्म हुआ; भारत के साथ अधिमिलन स्वतः पूरा नहीं हुआ। दूसरा और तीसरा कथन सही हैं क्योंकि निर्दिष्ट विषयों के आरंभिक ढाँचे के बाद शासन की अन्य व्यवस्थाएँ तय करनी थीं। अधिमिलन को पूर्ण प्रशासनिक विलय मानना एकीकरण के इस महत्त्वपूर्ण अंतर को मिटाता है।
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प्र.2 एक काल्पनिक संक्रमणकालीन समझौता शासन शक्तियों के हस्तांतरण का उल्लेख किए बिना किसी रियासत और पड़ोसी क्षेत्रों के बीच डाक तथा परिवहन सेवाएँ जारी रखता है। कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक उचित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) यह सेवा निरंतरता देता है; पूर्ण राजनीतिक विलय का निष्कर्ष नहीं निकलता
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। बताया गया उद्देश्य सेवाओं की निरंतरता है, जो यथास्थिति व्यवस्था की विशेषता है। इससे न अंतिम सीमाएँ तय होती हैं, न समस्त प्राधिकार का हस्तांतरण सिद्ध होता है। अन्य विकल्प समझौते में अनुपस्थित राजनीतिक या संवैधानिक परिणाम जोड़ते हैं और प्रशासनिक निरंतरता को अधिमिलन अथवा पूर्ण एकीकरण के समान मानते हैं।
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प्र.3 निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जूनागढ़ — फरवरी 1948 में भारत के पक्ष में जनमत-संग्रह 2. हैदराबाद — सितंबर 1948 के ऑपरेशन पोलो के बाद एकीकरण 3. राजस्थान — 1947 के एक अधिमिलन हस्ताक्षर से वर्तमान प्रशासनिक स्वरूप पूरा होना उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) केवल दो
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। जूनागढ़ और हैदराबाद की घटनाएँ सही सुमेलित हैं, इसलिए दो युग्म सही हैं। राजस्थान का एकीकरण क्रमिक संघों और बाद के समायोजनों से हुआ, एक अधिमिलन हस्ताक्षर से नहीं। गलत युग्म भारत से जुड़ने और बाद की प्रशासनिक इकाई बनाने में अंतर जाँचता है, केवल तारीख का ज्ञान नहीं।
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प्र.4 मौजूदा राज्य को विभाजित करने का प्रस्ताव अनुच्छेद 3 के अंतर्गत उसके विधानमंडल को भेजा गया है। निर्धारित अवधि समाप्त हो गई है और विधानमंडल ने विरोध व्यक्त किया है। अन्य संवैधानिक शर्तें पूरी होने पर कौन-सा कथन सही है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) राज्य के विचार बाध्यकारी सहमति नहीं हैं, इसलिए संसद आगे बढ़ सकती है
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। अनुच्छेद 3 प्रभावित राज्य विधानमंडल को विचार व्यक्त करने का अवसर देता है, संसद पर वीटो नहीं। इसलिए आवश्यक प्रक्रिया के बाद विरोध स्वयं कानून बनाने से नहीं रोकता। शक्ति संसदीय कानून से प्रयोग होती है; राष्ट्रपति की एकतरफा कार्रवाई या राज्यों का सामान्य अनुसमर्थन इस प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
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प्र.5 राज्य के नाम को प्रभावित करने वाले अनुच्छेद 3 के विधेयक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद में प्रस्तुति से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक है। 2. प्रभावित राज्य विधानमंडल के विचार बाध्यकारी नहीं हैं, इसलिए उन्हें माँगना वैकल्पिक है। 3. विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) केवल 1 और 3
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। राष्ट्रपति की सिफारिश और किसी भी सदन में प्रस्तुति अनुच्छेद 3 के अनुरूप हैं। नाम प्रभावित होने पर संबंधित राज्य को विचार व्यक्त करने का निर्धारित अवसर मिलना चाहिए। विचार बाध्यकारी न होने से परामर्श की आवश्यकता समाप्त नहीं होती। दूसरा कथन वीटो के अभाव को गलत ढंग से वैकल्पिक प्रक्रिया बना देता है।
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प्र.6 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन-I: अनुच्छेद 2 और 3 के कानून में पहली तथा चौथी अनुसूची के आवश्यक परिवर्तन हो सकते हैं, जबकि वह अनुच्छेद 368 का संशोधन नहीं माना जाता। कथन-II: अनुच्छेद 4 ऐसे पारिणामिक परिवर्तनों का स्पष्ट प्रावधान करता है और इस प्रयोजन के लिए ऐसे कानूनों को अनुच्छेद 368 से अलग रखता है। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) दोनों सही हैं और II, I की व्याख्या करता है
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। अनुच्छेद 4 कथन-I में बताई गई विशेष संवैधानिक व्यवस्था देता है, इसलिए कथन-II उसकी व्याख्या करता है। आवश्यक अनुसूची समायोजन और संबंधित पारिणामिक प्रावधान इस ढाँचे में अनुमत हैं। यह संबंधित कानूनों के लिए निर्धारित अपवाद है, असंबंधित संवैधानिक संशोधनों को अनुच्छेद 368 से बचाने की सामान्य छूट नहीं।
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प्र.7 निम्नलिखित प्रस्ताव–प्रावधान युग्मों पर विचार कीजिए: 1. संघ में नए राज्य का प्रवेश — अनुच्छेद 2 2. मौजूदा राज्य की सीमा में परिवर्तन — अनुच्छेद 3 3. पुनर्गठन कानून से असंबंधित संवैधानिक अधिकारों का पुनर्लेखन — अनुच्छेद 4 उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) केवल 1 और 2
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। अनुच्छेद 2 और 3 पहले दो प्रस्तावों से संबंधित हैं। अनुच्छेद 4 संबंधित कानूनों के आवश्यक अनुसूची परिवर्तन और अनुपूरक, आनुषंगिक तथा पारिणामिक प्रावधान के लिए है। असंबंधित संवैधानिक अधिकारों को केवल राज्य पुनर्गठन कानून में रख देने से उनका पुनर्लेखन अनुमत नहीं हो जाता। इसलिए तीसरा युग्म गलत है।
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प्र.8 भारतीय नागरिकों का एक वर्ग अलग राज्य या पृथक्करण की माँग किए बिना अपनी विशिष्ट लिपि का संरक्षण चाहता है। कौन-सी संवैधानिक व्याख्या सबसे उपयुक्त है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अनुच्छेद 29(1) दावे को संरक्षण दे सकता है; सांस्कृतिक संरक्षण स्वयं पृथक्करण नहीं है
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। अनुच्छेद 29(1) विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति वाले नागरिक वर्ग से संबंधित है, केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों से नहीं। संरक्षण के लिए अलग राज्य प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। संवैधानिक ढाँचे में संरक्षण एकता के कर्तव्य के साथ रह सकता है। अन्य विकल्प ऐसी अतिरिक्त पाबंदियाँ जोड़ते हैं जिनका यहाँ आधार नहीं है।
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प्र.9 स्वतंत्रता-पश्चात समेकन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 आरंभिक 1947 अधिमिलन व्यवस्थाओं के बाद के चरण का हिस्सा है। 2. आंतरिक राज्य सीमाएँ बदलने की माँग अवधारणात्मक रूप से भारत से अलग होने के दावे के समान है। 3. नई क्षेत्रीय व्यवस्था में सीमा खींचने के अतिरिक्त प्रशासनिक निर्णय आवश्यक हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) केवल 1 और 3
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। 1956 का पुनर्गठन आरंभिक अधिमिलन चरण के बाद आया और उसे लागू करने के लिए संस्थाओं, कर्मचारियों, परिसंपत्तियों तथा सेवाओं की व्यवस्था चाहिए। पहला और तीसरा कथन सही हैं। आंतरिक पुनर्गठन संघ के भीतर होता है; उसका अर्थ भारत से बाहर जाना नहीं है। दूसरा कथन अलग दावों को मिला देता है।
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प्र.10 एक विवरण पटेल को एकीकरण का केंद्रीय राजनीतिक नेता, मेनन को प्रमुख वार्ताकार और जूनागढ़ तथा हैदराबाद को अलग मार्गों वाले उदाहरण बताता है। कौन-सा निष्कर्ष सर्वाधिक समर्थित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) राजनीतिक नेतृत्व ने प्रशासनिक विशेषज्ञता के साथ परिस्थितिनुसार उपाय अपनाए
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। विवरण नेतृत्व, वार्ता और प्रशासनिक विशेषज्ञता की संयुक्त भूमिका तथा संदर्भ के अनुसार बदलते उपायों का समर्थन करता है। इससे सहायक कार्य अनावश्यक नहीं हो जाता और अपवादात्मक मार्ग सार्वभौमिक नियम नहीं बनता। अलग रास्ते साझा संवैधानिक ढाँचे तक पहुँच सकते हैं, इसलिए उपायों की विविधता एकीकरण को असंभव नहीं करती।
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