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प्र.1 स्थायी बंदोबस्त के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सरकार की राजस्व माँग सदा के लिए निश्चित थी। 2. परिणामस्वरूप प्रत्येक काश्तकार का देय लगान भी सदा के लिए निश्चित था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) केवल 1
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। पहला कथन सरकार के प्रति जमींदार की देनदारी से संबंधित है और सही है। दूसरा कथन उसी स्थायित्व को भू-स्वामी तथा काश्तकार के अलग संबंध पर लागू करता है। स्थायी सरकारी माँग बढ़े बिना भी लगान आय बढ़ सकती थी। इसलिए दोनों भुगतानों को एक जैसा समझना गलत है।
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प्र.2 एक औपनिवेशिक अभिलेख में खेतों के अलग सर्वेक्षण, राजस्व संपदा के लिए अनुमानित भुगतानों के योग और उसके स्वामित्व निकाय के सामूहिक उत्तरदायित्व का वर्णन है। कौन-सी विशेषता इस व्यवस्था को रैयतवाड़ी से सबसे स्पष्ट रूप से अलग करती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) स्वामित्व निकाय पर देनदारी रखना
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। निर्णायक अंतर राजस्व के उत्तरदायी पक्ष का है: व्यक्तिगत रैयत के बजाय स्वामित्व निकाय या महाल। खेत सर्वेक्षण और अभिलेख एक से अधिक व्यवस्थाओं में हो सकते हैं। रैयतवाड़ी तथा महालवाड़ी दोनों में पुनरीक्षण संभव था। इसलिए केवल इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं से वर्णित बंदोबस्त की पहचान नहीं होती।
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प्र.3 रैयतवाड़ी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसने राज्य और व्यक्तिगत कृषक के बीच प्रत्यक्ष राजस्व संबंध स्थापित किया। 2. ग्राम भू-स्वामियों का सामूहिक उत्तरदायित्व इसका परिभाषित बंदोबस्त सिद्धांत था। 3. इसके संचालन के लिए सर्वेक्षण और विस्तृत राजस्व प्रशासन आवश्यक था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। कथन 1 और 3 सही हैं। प्रत्यक्ष बंदोबस्त में अनेक व्यक्तिगत जोतें शामिल थीं, इसलिए आकलन, अभिलेख और अधिकारी आवश्यक थे। इसका अर्थ कर्मचारियों के बिना प्रशासन नहीं था। कथन 2 महालवाड़ी से जुड़े सामूहिक स्वामित्व दायित्व को रैयतवाड़ी पर लागू करता है, जिसका प्रमुख पक्ष व्यक्तिगत कृषक था।
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प्र.4 बंदोबस्त और उसकी प्रमुख क्षेत्रीय संबद्धता के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. स्थायी बंदोबस्त — बंगाल और बिहार 2. रैयतवाड़ी — उत्तर-पश्चिमी प्रांत और पंजाब 3. महालवाड़ी — मद्रास और बंबई 4. रैयतवाड़ी — मद्रास और बंबई उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) केवल 1 और 4
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। युग्म 1 और 4 प्रमुख क्षेत्रीय संबद्धताएँ सही बताते हैं। युग्म 2 और 3 में रैयतवाड़ी तथा महालवाड़ी के क्षेत्र बदल दिए गए हैं। ये व्यापक ऐतिहासिक संबद्धताएँ हैं, किसी प्रेसीडेंसी के प्रत्येक जिले में समान बंदोबस्त का दावा नहीं। स्थानीय अपवाद मुख्य तुलना को उलट नहीं देते।
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प्र.5 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन-I: स्थायी बंदोबस्त से जमींदारों को खेती सुधारने के लिए प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा थी। कथन-II: निश्चित सरकारी माँग चुकाने के बाद जमींदार संपदा की अतिरिक्त आय अपने पास रख सकते थे। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) दोनों कथन सही हैं और II, I की व्याख्या करता है
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। दोनों कथन अपेक्षित प्रोत्साहन बताते हैं। अतिरिक्त संपदा आय रखने की संभावना से जमींदारों को कृषि सुधार आकर्षक लगने की अपेक्षा थी; इसलिए कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है। यह नीति का तर्क है, सार्वभौमिक सफलता नहीं। समान निवेश या कृषक सुरक्षा के बिना भी अधिक लगान से आय बढ़ सकती थी।
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प्र.6 कंपनी को 1765 में दीवानी मिलने का बाद की भू-राजस्व नीतियों के लिए महत्व किस व्याख्या से सबसे अच्छी तरह स्पष्ट होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) इसने क्षेत्रीय राजस्व आधार दिया, जिसके बाद बंदोबस्त व्यवस्थाओं में प्रयोग हुए।
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। दीवानी से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व अधिकार मिला तथा उसका क्षेत्रीय वित्तीय आधार मजबूत हुआ। इससे बाद की तीन व्यवस्थाओं में से कोई एक तुरंत सभी क्षेत्रों में लागू नहीं हुई। स्थायी बंदोबस्त 1793 में आया, जबकि अन्य क्षेत्रों के प्रयोगों से अलग राजस्व संबंध विकसित हुए।
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प्र.7 औपनिवेशिक बंगाल के कुछ हिस्सों के जोतदारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उनका प्रभाव खेती, व्यापार और ऋण पर नियंत्रण पर आधारित हो सकता था। 2. जमींदार के औपचारिक राजस्व दायित्व के बावजूद वे उसकी वसूली का विरोध कर सकते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) 1 और 2 दोनों
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। दोनों कथन सही हैं। बड़े जोतदार आर्थिक संबंधों के माध्यम से स्थानीय शक्ति रखते थे और जमींदारों की अधिक वसूली का विरोध कर सकते थे। इससे स्पष्ट है कि राज्य के औपचारिक राजस्व पक्ष का ग्रामीण शक्ति पर एकाधिकार आवश्यक नहीं था। जोतदार और जमींदार एक ही भूमिका के पर्याय नहीं थे।
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प्र.8 1875 के दक्कन उपद्रवों को औपनिवेशिक कृषि अर्थव्यवस्था से कौन-सी व्याख्या सबसे समुचित रूप से जोड़ती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) बदलते कपास बाजार, राजस्व माँग और ऋणग्रस्तता के मेल से साहूकारों के साथ संघर्ष बढ़ा।
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। उपद्रव रैयतवाड़ी संदर्भ में कृषकों और साहूकारों से जुड़े थे, जहाँ बाजार परिवर्तन, राजस्व दबाव और संचित ऋण परस्पर प्रभाव डाल रहे थे। यह बंगाल के जमींदारों का आंदोलन या महालवाड़ी से स्थायी बंदोबस्त का परिवर्तन नहीं था। अनुकूल कपास तेजी बदल चुकी थी; लगातार समृद्धि संकट की व्याख्या नहीं करती।
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प्र.9 औपनिवेशिक बंदोबस्त श्रेणियों से निकाले गए निम्नलिखित निष्कर्षों पर विचार कीजिए: 1. रैयत से प्रत्यक्ष बंदोबस्त सिद्ध करता है कि कृषक साहूकारों से आर्थिक रूप से स्वतंत्र था। 2. महालवाड़ी का सामूहिक दायित्व सभी ग्रामवासियों का समान भूमि स्वामित्व सिद्ध करता है। उपर्युक्त निष्कर्षों में से कौन-सा/से वैध है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) न तो 1, न ही 2
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। कोई निष्कर्ष वैध नहीं है। रैयतवाड़ी राज्य के प्रति उत्तरदायी पक्ष बताती है, लेकिन उधार या आर्थिक शक्ति की असमानता समाप्त नहीं करती। महालवाड़ी सामूहिक राजस्व दायित्व बताती है, प्रत्येक निवासी का समान स्वामित्व नहीं। स्वामित्व हिस्से अलग हो सकते थे और काश्तकार तथा मजदूर स्वामित्व निकाय से बाहर हो सकते थे।
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प्र.10 स्थायी बंदोबस्त के अंतर्गत एक जमींदारी उसके धारक द्वारा राजस्व दायित्व पूरा न करने पर नीलाम होती है। कौन-सी व्याख्या इस व्यवस्था के स्वरूप के अनुरूप है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) निश्चित आकलन के साथ राजस्व भुगतान पर सशर्त स्वामित्व मौजूद था।
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। स्थायी आकलन ने सरकारी माँग निश्चित की, जबकि भुगतान दायित्व पूरा न होने पर संपदा खोई जा सकती थी। इसलिए वंशानुगत और हस्तांतरणीय अधिकार नीलामी से बिना शर्त सुरक्षा नहीं थे। भू-स्वामी बदलने से अपने आप व्यवस्था रैयतवाड़ी नहीं बनती थी और न आकलन का स्थायित्व समाप्त होता था।
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