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राजकोषीय, राजस्व और प्राथमिक घाटा: बजट को समझें — उत्तर सहित MCQ

राजकोषीय, राजस्व और प्राथमिक घाटा: बजट को समझें पर अपनी समझ को UPSC प्रीलिम्स-शैली के 10 प्रश्नों से परखें। पहले स्वयं हल करें, फिर सही विकल्प और व्याख्या के लिए “उत्तर देखें” दबाएँ।

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  • 10 अभ्यास प्रश्न
  • ≈ 10 मिनट
  • उत्तर और व्याख्या

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  1. प्र.1 सरकार को पहले दिए गए ऋण के मूलधन की वापसी मिलती है। यह प्राप्ति किस श्रेणी में आती है?

    1. A. गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्ति
    2. B. कर राजस्व
    3. C. कर-भिन्न राजस्व
    4. D. ऋण पूंजीगत प्राप्ति
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    सही उत्तर: (A) गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्ति

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। ऋण का मूलधन वापस मिलने से सरकार की वित्तीय परिसंपत्ति घटती है और नया ऋण उत्पन्न नहीं होता। इसलिए यह गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्ति है। यह कर नहीं है। उसी ऋण पर प्राप्त ब्याज कर-भिन्न राजस्व होगा, जबकि नई उधारी ऋण पूंजीगत प्राप्ति होगी।

  2. प्र.2 एक काल्पनिक बजट में ऋण के मूलधन की वापसी को छोड़कर कुल व्यय ₹1,000 करोड़, राजस्व प्राप्तियाँ ₹750 करोड़ और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ ₹50 करोड़ हैं। राजकोषीय घाटा कितना है?

    1. A. ₹250 करोड़
    2. B. ₹200 करोड़
    3. C. ₹300 करोड़
    4. D. ₹800 करोड़
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    सही उत्तर: (B) ₹200 करोड़

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। राजकोषीय घाटे के लिए कुल व्यय से राजस्व और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ घटती हैं। 1,000 में से 750 और 50 घटाने पर ₹200 करोड़ मिलता है। ₹250 करोड़ में पूंजीगत प्राप्तियाँ छूटती हैं, ₹300 करोड़ में वे गलत जुड़ती हैं और ₹800 करोड़ कुल गैर-ऋण प्राप्तियाँ हैं।

  3. प्र.3 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर मिलता है। 2. शून्य प्राथमिक घाटे के साथ सरकारी ऋण बकाया रह सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

    1. A. केवल 1
    2. B. केवल 2
    3. C. 1 और 2 दोनों
    4. D. न तो 1, न ही 2
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। दोनों कथन सही हैं। प्राथमिक घाटे में राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान हटाया जाता है। परिणाम शून्य होने पर राजकोषीय घाटा ब्याज भुगतान के बराबर होता है। स्वयं राजकोषीय घाटा शून्य होना आवश्यक नहीं है। ऋण एक भंडार है और यह वार्षिक संतुलन शून्य होने पर भी बना रह सकता है।

  4. प्र.4 किस स्थिति में राजस्व अधिशेष के साथ राजकोषीय घाटा हो सकता है?

    1. A. राजस्व व्यय राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो
    2. B. गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ सभी व्यय से अधिक हों
    3. C. पूंजीगत व्यय शून्य और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ धनात्मक हों
    4. D. पूंजीगत व्यय राजस्व अधिशेष और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के योग से अधिक हो
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (D) पूंजीगत व्यय राजस्व अधिशेष और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के योग से अधिक हो

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। राजस्व अधिशेष होने पर पूंजीगत व्यय से यह अधिशेष और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ घटाने पर राजकोषीय घाटा मिलता है। बचा धनात्मक अंतर घाटा दर्शाता है। राजस्व व्यय अधिक होने पर राजस्व घाटा होगा। अन्य दोनों स्थितियाँ आवश्यक धनात्मक वित्तपोषण अंतर नहीं छोड़ती हैं।

  5. प्र.5 प्रभावी राजस्व घाटा निकालने के लिए राजस्व घाटे में से क्या घटाया जाता है?

    1. A. पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान
    2. B. पूरा पूंजीगत व्यय
    3. C. उद्देश्य की परवाह किए बिना सभी अनुदान
    4. D. ब्याज भुगतान
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (A) पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। प्रभावी राजस्व घाटे में पूंजीगत परिसंपत्ति निर्माण हेतु पात्र अनुदान घटते हैं। इससे उन अनुदानों को पहचाना जाता है जो राजस्व व्यय में दर्ज हैं, लेकिन प्राप्तकर्ता उनसे परिसंपत्तियाँ बनाते हैं। पूरा पूंजीगत व्यय या सभी अनुदान नहीं घटते। राजकोषीय घाटे से ब्याज घटाने पर प्राथमिक घाटा मिलता है।

  6. प्र.6 निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. वार्षिक राजकोषीय घाटा — अवधि का प्रवाह 2. बकाया सरकारी ऋण — किसी तारीख का भंडार 3. सकल उधारी — अनिवार्यतः राजकोषीय घाटे के समान उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

    1. A. केवल 1 और 3
    2. B. केवल 1 और 2
    3. C. केवल 2 और 3
    4. D. 1, 2 और 3
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    सही उत्तर: (B) केवल 1 और 2

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। युग्म 1 और 2 प्रवाह तथा भंडार का सही अंतर बताते हैं। युग्म 3 गलत है, क्योंकि सकल उधारी से चालू अंतर के अलावा परिपक्व पुराने ऋण का पुनर्वित्तपोषण भी हो सकता है। इसलिए अवधि के घाटे, बकाया देयताओं और सकल उधारी को एक ही राशि नहीं समझना चाहिए।

  7. प्र.7 एक काल्पनिक घाटा ₹100 करोड़ से ₹110 करोड़ हो जाता है, जबकि चालू कीमतों पर जीडीपी ₹2,000 करोड़ से ₹2,500 करोड़ हो जाती है। कौन-सी व्याख्या सही है?

    1. A. रुपये में घाटा और उसका जीडीपी अनुपात दोनों घटते हैं
    2. B. अनुपात 5% पर अपरिवर्तित रहता है
    3. C. रुपये में घाटा बढ़ता है, लेकिन अनुपात 5% से 4.4% होता है
    4. D. रुपये में घाटा बढ़ने से अनुपात भी बढ़ता है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) रुपये में घाटा बढ़ता है, लेकिन अनुपात 5% से 4.4% होता है

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। पहला अनुपात 100 को 2,000 से भाग देने पर 5% है। दूसरा अनुपात 110 को 2,500 से भाग देने पर 4.4% है। जीडीपी की आनुपातिक वृद्धि घाटे से तेज है। इसलिए रुपये में घाटा बढ़ने पर भी अनुपात घटता है। अंश के साथ हर देखना आवश्यक है।

  8. प्र.8 अभिकथन (A): राजस्व व्यय अनिवार्यतः अपव्यय होता है। कारण (R): शिक्षकों का वेतन और स्वास्थ्य सुविधाओं का रखरखाव उपयोगी सार्वजनिक परिणाम दे सकते हैं। सही उत्तर चुनिए।

    1. A. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है
    2. B. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है
    3. C. A सही है, लेकिन R गलत है
    4. D. A गलत है, लेकिन R सही है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (D) A गलत है, लेकिन R सही है

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। अभिकथन गलत है, क्योंकि लेखांकन का वर्गीकरण व्यय को स्वतः अपव्यय सिद्ध नहीं करता। कारण सही है। शिक्षा में वेतन और स्वास्थ्य सेवाओं के रखरखाव से उपयोगी परिणाम मिल सकते हैं। इसी तरह पूंजीगत वर्गीकरण मात्र से परियोजना का कुशल चयन, पूर्ण होना या उपयोग सिद्ध नहीं होता।

  9. प्र.9 उधारी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजकोषीय घाटे की गणना में प्रयुक्त प्राप्तियों से उधारी बाहर रखी जाती है। 2. उधारी अंतर का वित्तपोषण करती है, उसे समाप्त करने वाला राजस्व नहीं बनती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

    1. A. 1 और 2 दोनों
    2. B. केवल 1
    3. C. केवल 2
    4. D. न तो 1, न ही 2
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    सही उत्तर: (A) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। दोनों कथन सही हैं। राजकोषीय घाटा ऋण उत्पन्न करने वाली प्राप्तियों से वित्तपोषण से पहले निकाला जाता है। उधारी को सामान्य राजस्व मानने पर मापा जाने वाला अंतर छिप जाएगा। उधारी से देयता बनती है, इसलिए ऋण से नकदी मिलने पर मापा गया राजकोषीय घाटा समाप्त नहीं होता।

  10. प्र.10 2026–27 के संघ बजट में 4.3% राजकोषीय घाटे के अनुमान की सही व्याख्या कौन-सी है?

    1. A. यह केंद्र और सभी राज्यों का संयुक्त अंतिम वास्तविक घाटा है
    2. B. यह जीडीपी के संदर्भ में संघ सरकार का बजटीय अनुमान है, पूरे वर्ष का वास्तविक परिणाम नहीं
    3. C. यह सिद्ध करता है कि रुपये में घाटा हर पिछले वर्ष से कम होना चाहिए
    4. D. यह जीडीपी के अनुपात में बकाया सरकारी ऋण है
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    सही उत्तर: (B) यह जीडीपी के संदर्भ में संघ सरकार का बजटीय अनुमान है, पूरे वर्ष का वास्तविक परिणाम नहीं

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। यह संघ सरकार का बजट अनुमान है और जीडीपी के संदर्भ में व्यक्त है। यह पूरे वर्ष का वास्तविक परिणाम, केंद्र-राज्यों का संयुक्त माप या ऋण भंडार का अनुपात नहीं है। केवल प्रतिशत से यह भी सिद्ध नहीं होता कि रुपये में घाटा अन्य वर्षों से कम है।

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