-
प्र.1 कौन-सा वर्णन अपवाह बेसिन और जलविभाजक का सही भेद बताता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) बेसिन नदी-तंत्र के लिए जल एकत्र करता है; विभाजक निकटवर्ती बेसिन अलग करता है
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। अपवाह बेसिन नदी और उसकी सहायक नदियों को जल देने वाला क्षेत्र है, जबकि विभाजक उसे दूसरे बेसिन से अलग करता है। प्रशासनिक सीमाएँ इन भौतिक इकाइयों को परिभाषित नहीं करतीं। ये न वर्षा तीव्रता या प्रवाह का माप हैं, न इनके लिए तटीय स्थिति आवश्यक है। गलत विकल्प अपवाह भूगोल को असंबंधित श्रेणियों से बदलते हैं।
-
प्र.2 अपवाह-प्रतिरूप के इन युग्मों पर विचार कीजिए: 1. वृक्षाकार — अपेक्षाकृत समान शैल प्रतिरोध में वृक्ष जैसी शाखाएँ 2. अरीय — केंद्रीय उच्चभूमि से बाहर की ओर प्रवाह कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 1 और 2 दोनों
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। दोनों युग्म सही हैं। वृक्षाकार अपवाह शाखाओं जैसा होता है और सामान्यतः अपेक्षाकृत समान प्रतिरोध में बनता है। अरीय अपवाह केंद्रीय उच्चभूमि से बाहर फैलता है। केवल एक स्वीकार करना दूसरा सही संबंध छोड़ना और दोनों नकारना दोनों प्रतिरूप चूकना है। ये व्यवस्था चैनलों की आकृति बताती है, अपने आप नदी की आयु या जल-मात्रा नहीं।
-
प्र.3 प्रतिरोधी और कमजोर शैल पट्टियाँ सहायक नदियों को मुख्य धारा से लगभग समकोण पर जोड़ती हैं। कौन-सा प्रतिरूप वर्णित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) जालीनुमा
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। लेख जालीनुमा अपवाह को बारी-बारी प्रतिरोधी और कमजोर पट्टियों तथा लगभग समकोण संगमों से जोड़ता है। अरीय प्रवाह उच्चभूमि से फैलता है और वृक्षाकार प्रवाह अपेक्षाकृत समान प्रतिरोध में वृक्ष जैसा है। प्रशासनिक सीमाएँ यह भूवैज्ञानिक व्यवस्था नहीं बनातीं। प्रतिरूप पहचानने के लिए शैल संरचना और धारा-संबंध दोनों साथ देखना आवश्यक है।
-
प्र.4 लेख में पहचाने गए तीन प्रमुख हिमालयी नदी-तंत्रों का समूह कौन-सा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र लेख में नामित तीन प्रमुख हिमालयी तंत्र हैं। गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, तापी और महानदी प्रायद्वीपीय तुलना में आती हैं। मिश्रित समूह में गंगा है, लेकिन उसके साथ प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं। भारत में स्थित होने मात्र से सभी नदियाँ हिमालयी तंत्र नहीं बन जातीं; भौगोलिक वर्गीकरण अलग है।
-
प्र.5 हिमालयी नदी प्रवाह के बारे में कौन-सा कथन उचित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वर्षा और हिम या हिमनद पिघलना अनेक नदियाँ पोषित करते हैं, पर प्रवाह बदलता है
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। अनेक हिमालयी नदियाँ वर्षा और हिम या हिमनद पिघलने से जल पाकर वर्षाकाल के बाद भी बहती हैं। फिर भी ऋतु, मौसम, हिम-दशा और मानव उपयोग से प्रवाह बदलता है। बारहमासी का अर्थ स्थिर प्रवाह नहीं और हर छोटी सहायक नदी के बारहमासी होने की गारंटी नहीं। अन्य विकल्प सामान्य प्रवृत्ति को निराधार सार्वभौमिक नियम बनाते हैं।
-
प्र.6 किस युग्म में पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) नर्मदा और तापी
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। नर्मदा और तापी प्रमुख पश्चिमवाहिनी अपवाद हैं, जो भ्रंश-सदृश घाटियों से अरब सागर की ओर जाती हैं। गोदावरी, कृष्णा, महानदी और कावेरी प्रमुख पूर्ववाहिनी नदियाँ हैं, जो बंगाल की खाड़ी की ओर जाती हैं। इसलिए हर अन्य युग्म प्रश्न में पूछे पश्चिमवाहिनी अपवाद के बजाय उसके विपरीत पूर्ववाहिनी प्रवृत्ति से संबंधित है।
-
प्र.7 नदी-तंत्र के इन युग्मों पर विचार कीजिए: 1. झेलम और चिनाब — सिंधु तंत्र 2. घाघरा और गंडक — गंगा तंत्र कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 1 और 2 दोनों
व्याख्या
सही उत्तर: (B)। दोनों युग्म लेख में सूचीबद्ध सहायक नदियों से मेल खाते हैं। झेलम और चिनाब सिंधु तंत्र में हैं, जबकि घाघरा और गंडक गंगा तंत्र को जल देती हैं। केवल एक स्वीकार करना दूसरा सही बेसिन-संबंध नकारना है। दोनों नकारने से दोनों सही संबंध छूटते हैं। सहायक नदी के नाम अलग रटने के बजाय अपवाह तंत्र से जोड़ने चाहिए।
-
प्र.8 अभिकथन: खड़ी पर्वतीय घाटियों से मैदानों में आते समय नदी निक्षेपण बढ़ सकता है। कारण: ढाल घटने से परिवहन ऊर्जा कम हो सकती है। सही संबंध चुनिए।
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है
व्याख्या
सही उत्तर: (D)। दोनों कथन सही हैं और नदी की ऊर्जा पर ढाल के प्रभाव से जुड़े हैं। कम ढाल निक्षेपण और पार्श्व गति बढ़ाकर बाढ़मैदान बना तथा धाराएँ बदल सकती है। अन्य विकल्प वर्णित प्रक्रिया नकारते हैं या उसका कारण-संबंध तोड़ते हैं। अधिक खड़ी ढाल सामान्यतः ऊर्ध्वाधर अपरदन के लिए उपलब्ध ऊर्जा बढ़ाती है।
-
प्र.9 कौन-सा मानवीय हस्तक्षेप नदी प्रवाह का समय बदलने के साथ तलछट भी रोक सकता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बाँध और जलाशय
व्याख्या
सही उत्तर: (A)। बाँध जल संग्रह करते, निकास का समय बदलते और तलछट रोकते हैं, जिससे अनुप्रवाह प्रक्रियाएँ बदलती हैं। जलविभाजक प्राकृतिक बेसिन सीमा है, यह संग्रह हस्तक्षेप नहीं। नदी का नामकरण और अपवाह वर्गीकरण अपने आप जल या तलछट नहीं रोकते। प्रश्न बेसिन के कार्य में भौतिक बदलाव पूछता है, केवल वर्णनात्मक पहचान नहीं।
-
प्र.10 पश्चिमी घाट और पश्चिमी तट के बीच अनेक नदियाँ अपेक्षाकृत छोटी और तीव्र ढाल वाली क्यों हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) पर्वतश्रेणी समुद्र के निकट है
व्याख्या
सही उत्तर: (C)। पश्चिमी घाट पश्चिमी तट के निकट हैं, इसलिए समुद्र तक उतरने का मार्ग छोटा है। हिमालयी हिमनद उद्गम और अनिवार्य पूर्वी तट पार करना इन स्थानीय नदियों का वर्णन नहीं हैं। पर्वतश्रेणी को भीतर बहुत दूर बताना भौगोलिक संबंध उलट देता है। उच्चावच और दूरी मिलकर छोटे तथा तीव्र ढाल वाले मार्ग समझाते हैं।
और MCQ अभ्यास सेट
सभी MCQ सेट- एनसीईआरटी मौर्य प्रशासन: संरचना, स्रोत और सीमाएँ
- वैकल्पिक विषय एवं विषयवार रणनीति औपनिवेशिक भू-राजस्व: स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी
- समसामयिकी पंपित भंडारण जलविद्युत: ऊर्जा, दक्षता और विद्युत ग्रिड
- वैकल्पिक विषय एवं विषयवार रणनीति संवैधानिक रिट: अनुच्छेद 32 और 226 की समझ
- समसामयिकी खेलो इंडिया खेल सामग्री योजना: विनिर्माण और लघु उद्यम
- समसामयिकी राष्ट्रीय एकता दिवस: पटेल, एकीकरण और भारतीय संघ