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भारत की मृदाएँ: प्रकार, वितरण और प्रमुख विशेषताएँ — उत्तर सहित MCQ

भारत की मृदाएँ: प्रकार, वितरण और प्रमुख विशेषताएँ पर अपनी समझ को UPSC प्रीलिम्स-शैली के 10 प्रश्नों से परखें। पहले स्वयं हल करें, फिर सही विकल्प और व्याख्या के लिए “उत्तर देखें” दबाएँ।

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  • 10 अभ्यास प्रश्न
  • ≈ 10 मिनट
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  1. प्र.1 लेख में बताए गए मृदा-निर्माण कारकों का समूह कौन-सा है?

    1. A. केवल मिट्टी का रंग और राज्य की सीमाएँ
    2. B. केवल फसल की कीमत और बाजार पहुँच
    3. C. मूल पदार्थ, जलवायु, जीव, उच्चावच और समय
    4. D. केवल नवीनतम ऋतु की वर्षा
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    सही उत्तर: (C) मूल पदार्थ, जलवायु, जीव, उच्चावच और समय

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। मृदा मूल पदार्थ, जलवायु, जीव, उच्चावच और समय की परस्पर क्रिया से बनती है। रंग एक गुण है, जबकि राज्य सीमाएँ प्रशासनिक रेखाएँ हैं। फसल की कीमत आर्थिक निर्णय से संबंधित है, सूचीबद्ध निर्माण कारकों से नहीं। एक ऋतु की वर्षा मृदा विकास की दीर्घकालिक संयुक्त प्रक्रियाओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

  2. प्र.2 इन कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के व्यापक मृदा समूह एक पूर्ण औपचारिक वैज्ञानिक वर्गिकी बनाते हैं। 2. एक व्यापक समूह में औपचारिक रूप से वर्गीकृत अनेक मृदाएँ हो सकती हैं। कौन-सा कथन सही है?

    1. A. केवल 2
    2. B. केवल 1
    3. C. 1 और 2 दोनों
    4. D. न तो 1, न ही 2
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    सही उत्तर: (A) केवल 2

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। कथन 2 सही है: भौगोलिक समूहों में अलग-अलग औपचारिक वर्गों की मृदाएँ हो सकती हैं। कथन 1 गलत है क्योंकि जलोढ़ या काली जैसे परिचित नाम व्यावहारिक व्यापक श्रेणियाँ हैं, एक पूर्ण वैज्ञानिक वर्गिकी नहीं। औपचारिक प्रणालियाँ गण और उपसमूह पहचानती हैं। अन्य विकल्प गलत समानता स्वीकारते हैं या समूह के भीतर वास्तविक विविधता नकारते हैं।

  3. प्र.3 उत्तरी मैदानों में खादर और बाँगर का सही भेद कौन-सा युग्म बताता है?

    1. A. खादर: बेसाल्टजनित चिकनी मिट्टी; बाँगर: पवनोढ़ मरुस्थलीय रेत
    2. B. खादर: पुरानी ऊँची वेदिकाएँ; बाँगर: नए सक्रिय बाढ़मैदान
    3. C. खादर: पर्वतीय पीट; बाँगर: तटीय लवण निक्षेप
    4. D. खादर: नए बाढ़मैदानी निक्षेप; बाँगर: ऊँची वेदिकाओं के पुराने निक्षेप
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    सही उत्तर: (D) खादर: नए बाढ़मैदानी निक्षेप; बाँगर: ऊँची वेदिकाओं के पुराने निक्षेप

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। खादर सक्रिय बाढ़मैदानों के निकट नए निक्षेप और बाँगर ऊँची वेदिकाओं के पुराने जलोढ़ निक्षेप हैं। इन संबंधों को उलटना गलत है। बेसाल्टजनित चिकनी मिट्टी, मरुस्थलीय रेत, पर्वतीय पीट और तटीय लवण इस पारंपरिक भेद को परिभाषित नहीं करते। यह भेद सापेक्ष आयु और भू-दृश्य में स्थिति का है, सुनिश्चित उर्वरता का नहीं।

  4. प्र.4 अभिकथन: काली मिट्टी में शुष्क मौसम में चौड़ी दरारें पड़ सकती हैं। कारण: उसका चिकनी मिट्टी से समृद्ध पदार्थ सूखने पर सिकुड़ता और गीला होने पर फूलता है। सही संबंध चुनिए।

    1. A. दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता
    2. B. दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है
    3. C. अभिकथन सही है, पर कारण गलत है
    4. D. अभिकथन गलत है, पर कारण सही है
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    सही उत्तर: (B) दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। दोनों कथन सही हैं और सूखने पर सिकुड़ना दरारों की व्याख्या करता है। लेख यह फूलने-सिकुड़ने का व्यवहार बेसाल्टयुक्त दक्कन की चिकनी मिट्टी से समृद्ध काली मृदा से जोड़ता है। किसी कथन को गलत कहना या संबंध नकारना प्रक्रिया की उपेक्षा है। अधिक चिकनी मिट्टी से जलनिकास धीमा और खेत में काम कठिन भी हो सकता है।

  5. प्र.5 लाल और पीली मृदाओं के रंग का मुख्य कारण क्या है?

    1. A. लौह यौगिक
    2. B. सर्वत्र उच्च उर्वरता की गारंटी
    3. C. केवल हाल के नदी निक्षेपों से निर्माण
    4. D. हर स्थान पर स्थायी जलभराव
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    सही उत्तर: (A) लौह यौगिक

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। लेख के अनुसार लौह यौगिक लाल और पीले रंग में योगदान करते हैं। रंग समान उर्वरता की गारंटी नहीं है क्योंकि बनावट, अम्लता, नमी और पोषक आपूर्ति बदलती है। हाल का नदी निक्षेप जलोढ़ निर्माण बताता है, इन रंग समूहों को नहीं। प्रायद्वीपीय उच्चभूमियों में स्थायी जलभराव भी इनकी परिभाषित विशेषता नहीं है।

  6. प्र.6 कौन-सा मृदा-प्रक्रिया संबंध सही है?

    1. A. जलोढ़ — केवल मरुस्थलीय वाष्पीकरण से निर्माण
    2. B. शुष्क — लगातार अधिक वर्षा और जलभराव
    3. C. लैटेराइट — उष्ण आर्द्र परिस्थितियों में तीव्र अपक्षय और निक्षालन
    4. D. काली — अधिक चिकनी मिट्टी के बावजूद फूलने-सिकुड़ने का अभाव
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) लैटेराइट — उष्ण आर्द्र परिस्थितियों में तीव्र अपक्षय और निक्षालन

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। लैटेराइट मृदा उष्ण आर्द्र दशाओं में तीव्र अपक्षय और निक्षालन से बनती है, जहाँ अक्सर आर्द्र-शुष्क अवधियाँ बदलती हैं। जलोढ़ में नदी निक्षेपण होता है। शुष्क मृदा कम वर्षा और अधिक वाष्पीकरण से जुड़ी है। काली मृदा फूलती-सिकुड़ती है। प्रत्येक गलत युग्म संबंधित समूह के वर्णित गुण के विपरीत प्रक्रिया जोड़ता है।

  7. प्र.7 किसी संवेदनशील शुष्क खेत में कौन-सी पद्धति द्वितीयक लवणता उत्पन्न कर सकती है?

    1. A. जाँच के बाद स्थानानुकूल जलनिकास
    2. B. पर्याप्त जलनिकास के बिना सिंचाई
    3. C. पवन अपरदन घटाने के लिए आश्रय पट्टियाँ
    4. D. पोषक प्रयोग के मार्गदर्शन हेतु मृदा परीक्षण
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (B) पर्याप्त जलनिकास के बिना सिंचाई

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। पर्याप्त जलनिकास के बिना सिंचाई से संवेदनशील शुष्क मृदा में लवण जमा हो सकते हैं। सुव्यवस्थित जलनिकास इस जोखिम का समाधान है, कारण नहीं। आश्रय पट्टियाँ पवन अपरदन घटाती हैं और मृदा परीक्षण पोषक प्रबंधन में सहायता करता है। शुष्कता और सिंचाईजनित लवणता संबंधित चिंताएँ हैं, पर एक जैसी निर्माण प्रक्रियाएँ नहीं हैं।

  8. प्र.8 इन युग्मों पर विचार कीजिए: 1. ढाल वाली भूमि — समोच्च खेती और सीढ़ीकरण 2. शुष्क पवनयुक्त क्षेत्र — आश्रय पट्टियाँ और नियंत्रित चराई कौन-से सही सुमेलित हैं?

    1. A. केवल 1
    2. B. केवल 2
    3. C. न तो 1, न ही 2
    4. D. 1 और 2 दोनों
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (D) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। दोनों युग्म संरक्षण उपायों को स्थलस्थिति से सही जोड़ते हैं। समोच्च खेती और सीढ़ियाँ ढाल पर बहाव धीमा करती हैं। आश्रय पट्टियाँ और नियंत्रित चराई शुष्क क्षेत्रों में पवन अपरदन का जोखिम घटाती हैं। केवल एक चुनना दूसरे उचित उपाय को छोड़ना और दोनों नकारना स्थानीय क्षरण प्रक्रिया के अनुरूप संरक्षण की उपेक्षा करना है।

  9. प्र.9 कौन-सा कथन जलोढ़ मृदा के वितरण का सही वर्णन करता है?

    1. A. ये उत्तरी मैदानों के साथ नदी घाटियों, तटीय मैदानों और डेल्टाओं में भी हैं
    2. B. ये केवल गंगा बेसिन में हैं
    3. C. ये बेसाल्टयुक्त दक्कन उच्चभूमि तक सीमित हैं
    4. D. ये केवल हिमालय के सर्वोच्च ढालों पर हैं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (A) ये उत्तरी मैदानों के साथ नदी घाटियों, तटीय मैदानों और डेल्टाओं में भी हैं

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। जलोढ़ मृदा सिंधु-गंगा और ब्रह्मपुत्र के मैदानों के अलावा घाटियों, तटीय मैदानों और डेल्टाओं में मिलती है। इसे केवल गंगा बेसिन तक सीमित करना अन्य नदी-निक्षेपित भू-दृश्यों को बाहर रखना है। बेसाल्टयुक्त दक्कन उच्चभूमि काली मृदा से जुड़ी है, जबकि सर्वोच्च पर्वतीय ढाल जलोढ़ निक्षेपों के सामान्य वितरण को परिभाषित नहीं करते।

  10. प्र.10 लवण-प्रभावित भूमि के लिए कौन-सा दृष्टिकोण उचित है?

    1. A. हर लवण-प्रभावित खेत में एक ही सुधारक लगाना
    2. B. जलनिकास अनदेखा करके केवल रंग पर निर्भर रहना
    3. C. लवणता और सोडिकता का भेद करके स्थानानुकूल जलनिकास और सुधारक अपनाना
    4. D. हर लवणीय मृदा को हर शुष्क मृदा जैसा मानना
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) लवणता और सोडिकता का भेद करके स्थानानुकूल जलनिकास और सुधारक अपनाना

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। लेख जलनिकास और सुधारक चुनने से पहले लवणता तथा सोडिकता की जाँच सुझाता है। अलग कारणों और स्थानीय दशाओं के लिए अलग उपाय चाहिए। एक सार्वभौमिक सुधारक विविधता की उपेक्षा करता है। रंग जाँच या जलनिकास आकलन का विकल्प नहीं और शुष्क मृदा सभी सिंचित या तटीय लवण-प्रभावित मृदाओं के समान नहीं है।

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