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भारत में महँगाई: CPI, WPI और GDP अपस्फीतिकारक — उत्तर सहित MCQ

भारत में महँगाई: CPI, WPI और GDP अपस्फीतिकारक पर अपनी समझ को UPSC प्रीलिम्स-शैली के 10 प्रश्नों से परखें। पहले स्वयं हल करें, फिर सही विकल्प और व्याख्या के लिए “उत्तर देखें” दबाएँ।

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  • 10 अभ्यास प्रश्न
  • ≈ 10 मिनट
  • उत्तर और व्याख्या

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  1. प्र.1 एक मूल्य सूचकांक एक वर्ष में 150 से 156 होता है। वर्ष-दर-वर्ष मुद्रास्फीति दर कितनी है?

    1. A. 6 प्रतिशत
    2. B. 56 प्रतिशत
    3. C. 4 प्रतिशत
    4. D. 156 प्रतिशत
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) 4 प्रतिशत

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। दर का सूत्र (156 को 150 से भाग देकर एक घटाना) गुणा 100 है, जिससे 4 प्रतिशत मिलता है। छह सूचकांक-अंकों की वृद्धि है, प्रतिशत परिवर्तन नहीं। छप्पन पिछले वर्ष के बजाय 100 के आधार से तुलना करता है। सूचकांक का स्तर 156 स्वयं मुद्रास्फीति दर नहीं है; स्तर और दर अलग हैं।

  2. प्र.2 इन कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवस्फीति का अर्थ सामान्य मूल्य-स्तर गिरना है। 2. अपस्फीति का अर्थ सामान्य मूल्य-स्तर गिरना है। कौन-सा सही है?

    1. A. केवल 2
    2. B. केवल 1
    3. C. 1 और 2 दोनों
    4. D. न तो 1, न ही 2
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (A) केवल 2

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। कथन 2 सही है: अपस्फीति सामान्य मूल्य-स्तर की गिरावट है। अवस्फीति में कीमतें बढ़ती रहती हैं, लेकिन धीमी दर से; इसलिए कथन 1 गलत है। दोनों स्वीकार करना धीमी मुद्रास्फीति को गिरती कीमतों से भ्रमित करना है। दोनों नकारना अपस्फीति की सही परिभाषा छोड़ना है। एक सस्ती वस्तु इनमें से कोई सामान्य स्थिति स्थापित नहीं करती।

  3. प्र.3 उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की दो वस्तुओं में समान प्रतिशत मूल्य-वृद्धि का कुल सूचकांक पर अलग प्रभाव क्यों हो सकता है?

    1. A. हर वस्तु का व्यय-भार अनिवार्यतः समान है
    2. B. यह सूचकांक घरेलू भारों के बिना केवल थोक वस्तुएँ मापता है
    3. C. कम भार वाली वस्तु का प्रभाव हमेशा अधिक होता है
    4. D. उनके व्यय-भार अलग हो सकते हैं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (D) उनके व्यय-भार अलग हो सकते हैं

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के भार घरेलू व्यय में सापेक्ष महत्त्व दिखाते हैं। अन्य बातें समान हों तो समान प्रतिशत मूल्य-वृद्धि का अधिक भार वाली वस्तु पर सामान्यतः बड़ा प्रभाव होता है। समान भार सुनिश्चित नहीं हैं। केवल थोक कवरेज बताना सूचकांक की गलत पहचान और कम भार को स्वतः अधिक प्रभाव देना भार-तर्क उलटना है।

  4. प्र.4 इन संस्थागत युग्मों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक — सांख्यिकी मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय 2. थोक मूल्य सूचकांक — उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के अधीन आर्थिक सलाहकार कार्यालय कौन-से सही सुमेलित हैं?

    1. A. केवल 1
    2. B. 1 और 2 दोनों
    3. C. केवल 2
    4. D. न तो 1, न ही 2
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (B) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। दोनों युग्म लेख के संस्थागत वर्णन से मेल खाते हैं। सांख्यिकी मंत्रालय का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और संबंधित विभाग का आर्थिक सलाहकार कार्यालय थोक सूचकांक संकलित करता है। केवल एक स्वीकार करना दूसरा सही युग्म नकारना और दोनों अस्वीकार करना संकलकों को भ्रमित करना है। संकलन की भूमिका मौद्रिक नीति समिति के नीतिगत दर निर्णय से अलग है।

  5. प्र.5 लेख के अनुसार उपभोक्ता और थोक मूल्य सूचकांक के कवरेज का कौन-सा भेद सही है?

    1. A. उपभोक्ता सूचकांक घरेलू खुदरा वस्तुएँ और सेवाएँ; वर्णित थोक श्रृंखला वस्तुएँ मापती और सेवाएँ छोड़ती है
    2. B. दोनों केवल घरेलू सेवाएँ मापते हैं
    3. C. थोक सूचकांक हर परिवार का व्यक्तिगत जीवन-यापन माप है
    4. D. उपभोक्ता सूचकांक सभी सेवाएँ छोड़ता और थोक सूचकांक केवल सेवाएँ लेता है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (A) उपभोक्ता सूचकांक घरेलू खुदरा वस्तुएँ और सेवाएँ; वर्णित थोक श्रृंखला वस्तुएँ मापती और सेवाएँ छोड़ती है

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। उपभोक्ता सूचकांक वस्तुओं और सेवाओं की भारित खुदरा उपभोग टोकरी देखता है। वर्णित थोक श्रृंखला थोक वस्तुओं को मापती और सेवाएँ छोड़ती है। अन्य विकल्प दोनों को सेवाओं तक सीमित करते, थोक को व्यक्तिगत बनाते या कवरेज उलटते हैं। किसी सूचकांक से हर परिवार का अनुभव ठीक नहीं मिलता क्योंकि खर्च के प्रतिरूप अलग होते हैं।

  6. प्र.6 सांकेतिक सकल घरेलू उत्पाद 240 इकाई और वास्तविक उत्पाद 200 इकाई है। लेख के सूत्र से सकल घरेलू उत्पाद अपस्फीतिकारक कितना है?

    1. A. 20
    2. B. 83.33
    3. C. 120
    4. D. 440
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) 120

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। सकल घरेलू उत्पाद अपस्फीतिकारक सांकेतिक उत्पाद को वास्तविक उत्पाद से भाग देकर 100 से गुणा करने पर मिलता है। इसलिए 240 भाग 200 गुणा 100 बराबर 120 है। बीस संदर्भ मान 100 से प्रतिशत अधिकता है, स्वयं सूचकांक नहीं। अनुपात उलटने से लगभग 83.33 और दोनों उत्पाद जोड़ने से असंबंधित 440 मिलता है।

  7. प्र.7 इन कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपभोक्ता सूचकांक में आयातित उपभोग वस्तुएँ हो सकती हैं। 2. उत्पाद अपस्फीतिकारक घरेलू उत्पादन देखता है, आयातित वस्तुओं को घरेलू उत्पादन नहीं मानता। कौन-से सही हैं?

    1. A. केवल 1
    2. B. 1 और 2 दोनों
    3. C. केवल 2
    4. D. न तो 1, न ही 2
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (B) 1 और 2 दोनों

    व्याख्या

    सही उत्तर: (B)। दोनों कथन सही हैं। उपभोक्ता सूचकांक घरेलू उपभोग देखता है, जिसमें आयातित उपभोग वस्तुएँ आ सकती हैं। उत्पाद अपस्फीतिकारक घरेलू रूप से उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को देखता है। केवल एक चुनना दूसरा सही कवरेज-भेद छोड़ना है। दोनों नकारना इस कारण की उपेक्षा है कि सही संकलन के बावजूद दोनों माप अलग क्यों हो सकते हैं।

  8. प्र.8 अभिकथन: अधिक थोक कीमतें तुरंत और पूरी तरह उपभोक्ता कीमतों में पहुँचना आवश्यक नहीं। कारण: फर्में लागत लाभ-मार्जिन में समाहित, उत्पादकता से संतुलित या देर से हस्तांतरित कर सकती हैं। सही संबंध चुनिए।

    1. A. दोनों सही हैं, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता
    2. B. अभिकथन सही है, पर कारण गलत है
    3. C. अभिकथन गलत है, पर कारण सही है
    4. D. दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (D) दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है

    व्याख्या

    सही उत्तर: (D)। दोनों कथन सही हैं और कारण अधूरे या विलंबित हस्तांतरण को समझाता है। विशेषकर कमजोर माँग में लागत-दबाव समाहित, संतुलित या बाद में हस्तांतरित हो सकता है। अन्य विकल्प प्रक्रिया नकारते हैं या उसे मूल्य-परिणाम से अलग करते हैं। इसलिए थोक और उपभोक्ता सूचकांकों की गति का आकार या समय समान होना आवश्यक नहीं है।

  9. प्र.9 कौन-सा युग्म मुद्रास्फीतिक प्रक्रियाओं की सही पहचान करता है?

    1. A. माँग-प्रेरित: माँग आपूर्ति क्षमता से तेज बढ़े; लागत-प्रेरित: उत्पादन या वितरण लागत बढ़े
    2. B. माँग-प्रेरित: सामान्य मूल्य-स्तर गिरे; लागत-प्रेरित: कीमतें धीमी बढ़ें
    3. C. माँग-प्रेरित: केवल एक आयातित वस्तु सस्ती हो; लागत-प्रेरित: उत्पाद कीमत कभी न बदले
    4. D. माँग-प्रेरित और लागत-प्रेरित सूचकांक आधार बदलने के समान नाम हैं
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (A) माँग-प्रेरित: माँग आपूर्ति क्षमता से तेज बढ़े; लागत-प्रेरित: उत्पादन या वितरण लागत बढ़े

    व्याख्या

    सही उत्तर: (A)। माँग-प्रेरित दबाव तब आता है जब माँग आपूर्ति क्षमता से तेज बढ़ती है; लागत-प्रेरित दबाव उत्पादन या वितरण लागत बढ़ने से आता है। अन्य विकल्प इन्हें अपस्फीति, अवस्फीति, अकेले मूल्य-परिवर्तन या आधार-संशोधन से भ्रमित करते हैं। दोनों बल साथ चल सकते हैं और एक मासिक दर अपने आप कारण का निदान नहीं करती।

  10. प्र.10 वार्षिक मुद्रास्फीति तुलना में आधार प्रभाव क्या है?

    1. A. मुद्रास्फीति धीमी होते ही वर्तमान कीमतें गिरने की गारंटी
    2. B. अलग आधार-वर्ष श्रृंखलाओं के कच्चे स्तर सीधे तुलना योग्य होने का नियम
    3. C. पिछला तुलना मान असामान्य रूप से ऊँचा या नीचा होने से मापी गई वार्षिक दर बदलना
    4. D. हर टोकरी में वस्तुओं और सेवाओं की संख्या का अंतर
    उत्तर देखें

    सही उत्तर: (C) पिछला तुलना मान असामान्य रूप से ऊँचा या नीचा होने से मापी गई वार्षिक दर बदलना

    व्याख्या

    सही उत्तर: (C)। आधार प्रभाव तब आता है जब पहले का तुलना काल असामान्य रूप से ऊँचा या नीचा हो। इससे वार्षिक दर बदल सकती है, पर वर्तमान मूल्य-गति अकेले नहीं समझती। धीमी मुद्रास्फीति में कीमतें गिरना आवश्यक नहीं। अलग आधार के सूचकांकों को उचित जोड़ चाहिए और वस्तु-संख्या लेख में वर्णित तुलना-आधार प्रभाव की परिभाषा नहीं है।

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